लडखडाता हूँ, गिरता संभलता हूँ,
दोस्तों के बिना पोंड का चक्कर लगाने में वक़्त तो लगता है |
आज तो ऑफिस जाने में भी वक़्त तो लगता है |
आज उस दिल में अरमान जगाने में वक़्त तो लगता है |
तेरे बिना ऐ मेरे दोस्त उनको आने में भी वक़्त तो लगता है |
दोस्तों के बिना पोंड का चक्कर लगाने में वक़्त तो लगता है |
जो हिलाता था बालों को MDP की छत पर
उस हवा के झोंकें को आने में वक़्त तो लगता है |
उस हवा के झोंकें को आने में वक़्त तो लगता है |
वो रोबोट की अदाएं, वो चिल्लाना बाबा का,
लिम्जे के छोटे थे जो बाल, उनको आज सुलझाने में वक़्त तो लगता है |
चिंता की जब कोई बात नहीं होती थी,
आज तो माथे की शिकन मिटने में वक़्त तो लगता है |
बकर में छु आते थे तारे, घूम लेते थे जहाँ,आज तो माथे की शिकन मिटने में वक़्त तो लगता है |
आज तो ऑफिस जाने में भी वक़्त तो लगता है |
meetings में भारी हो जाती है पलकें, आती है झमाहिया,
वो lecture में सोने की आदत भुलाने में वक़्त तो लगता है |
जो फिसलता था हर एक हसीना पर,वो lecture में सोने की आदत भुलाने में वक़्त तो लगता है |
आज उस दिल में अरमान जगाने में वक़्त तो लगता है |
न होगी वो रात की चाय, न होंगे वो दोस्त,
वक़्त को खुद को दोहराने में वक़्त तो लगता है |
टीस उठती है तो बह जाने दो आंसू,वक़्त को खुद को दोहराने में वक़्त तो लगता है |
तेरे बिना ऐ मेरे दोस्त उनको आने में भी वक़्त तो लगता है |
हंस ले ऐ आस्मां चूमेंगे तुझे भी एक दिन,
अंडे से बहार निकले चूजे के पंख आने में वक़्त तो लगता है |
अंडे से बहार निकले चूजे के पंख आने में वक़्त तो लगता है |
waah waah... kya baat hai :)
ReplyDeletebest of kulfiwala's...
ReplyDeleteshaaaandar and jaaandar
shabbash mere sher :) ghar dhoondhne mein bhi bahut waqt lagta hai waise... :P
ReplyDeletekya baat likh daali..
ReplyDeletenitie ki saari yaadein khod-khod kar nikal daali...
mast hai!
Good One!!
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