मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला,
प्रियवर अपने ही हाथों से आज पिलाऊंगा प्याला;
पहले भोग लगा लूँ तेरा फिर प्रसाद जग पायेगा,
सबसे पहले तेरा स्वागत करती मेरी मधुशाला|
Tuesday, September 07, 2010
उड़ान (Meri Rachna)
कोहरा गुरुर का जो छंटता
तो कुछ दूर तुम मेरे साथ आते!
प्यार की हरी डूब पर थोडा जो रुकते,
तो कुछ दूर तुम मेरे साथ आते!
निभाई जिम्मेदारी आपने मानता हूँ मैं
रिश्तों को भी जरा निभाते
तो कुछ दूर तुम मेरे साथ आते!
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