Saturday, August 07, 2010

उड़ान भाग २

जो लहरों से आगे नजर देख पाती,
तो तुम जान लेते मैं क्या सोचता हूँ;
वो आवाज़तुमको भी जो भेद जाती,
 तो तुम जान लेते मैं क्या सोचता हूँ| 
जिद का तुम्हारे जो पर्दा सरकता,
तो खिडकियों से आगे भी तुम देख पाते;
आँखों से आदतों की जो पलकें हटाते,
तो तुम जान लेते मैं क्या सोचता हूँ|

मेरी तरह खुद पर होता ज़रा भरोसा,
तो कुछ दूर तुम भी साथ साथ आते;
रंग मेरी आँखों का बांटते ज़रा सा,
तो कुछ दूर तुम भी साथ साथ आते|
नशा आसमान का जो चूमता तुम्हे भी,
हसरते तुम्हारी नया जन्म पाती;
खुद दुसरे जन्म मैं मेरी उड़ान छूने,
कुछ दूर तुम भी साथ साथ आते|

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