Sunday, December 06, 2009

Prasoon Pande ki Kavita

अक्ल ये कहती है, सयानों से बनाए रखना,
दिल ये कहता है, दीवानों से बनाए रखना !

लोग टिकने नहीं देते हैं कभी चोटी पर,
जान-पहचान ढलानों से बनाए रखना !!
जाने किस मोड़ पे मिट जाएँ निशां मंज़िल के,
राह के ठौर-ठिकानों से बनाए रखना !

हादसे हौसले तोड़ेंगे सही है फिर भी,
चंद जीने के बहानों से बनाए रखना !!
शायरी ख़्वाब दिखाएगी कई बार मगर,
दोस्ती ग़म के फ़सानों से बनाए रखना !

आशियाँ दिल में रहे आसमान आँखों में
यूँ भी मुमकिन है उड़ानों से बनाए रखना !
दिन को दिन, रात को जो रात नहीं कहते हैं,
फ़ासले उनके बयानों से बनाए रखना|